mystery of human

आत्मबोध

आदमी ही सुख है … आदमी ही दुख है l आदमी ही दोस्त है… आदमी ही दुश्मन है ll आदमी ही है पतन की गहराइयों में l आदमी ही है अमरत्व की ऊंचाइयों में ll हवस भी है आदमी और वासना भी है आदमी l अशांति भी है आदमी और क्लेश भी है आदमी ll …

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