मुझको अकेला रह लेने दो ।

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मुझको अकेला रह लेने दो ,

कुछ वक़्त ख़ुद से मुलाकात तो कर लेने दो।

एक अरसा हुआ मिला नहीं हूँ, ज़माने के शोरगुल में ख़ुद की आवाज़ नहीं सुन पा
रहा हूँ ,

दुनियादारी निभाते- निभाते ख़ुद से यारी निभाना भूल सा गया हूँ ।

अपने आप को पहचानता तो हूँ, पर अपने आप को जानना भूल सा गया हूँ।

अपने साये से गुफ्तगू तो कर लूँ, दिल से बतिया तो लूँ,

ज़िन्दगी के चार पल अपने संग गुज़ार तो लूँ,

ख़ुद से एक नाता जोड़ तो लूँ,

अपनी रूह में समा तो लेने दो ।

फिर मिलूँगा ज़िन्दगी के किसी मोड़ पर,

अपनी इस नई पहचान के साथ, नई समझ के साथ,

तब तेरी हर शिकायत दूर करूँगा, तेरी हर नाज़ उठाऊँगा।

लेकिनअब -मुझको अकेला रह लेने दो।

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